ज्योतिष में सूर्य सिद्धान्त संक्रांति के अनुसार वर्ष में छह ऋतुएँ होती हैं जिसमें प्रत्येक ऋतु दो-दो माह की एवं प्रत्येक में दो-दो राशियां बताई गई है-
उत्तरायण के साथ शिशिर ऋतु प्रारंभ होती है जिसमें तीन ऋतुएँ हैं -
१. शिशिर ऋतु - माघ एवं फाल्गुन मास अर्थात 21 दिसम्बर से 17 फरवरी एवं दो राशियां मकर और कुम्भ
२. वसंत ऋतु -चैत्र और वैशाख मास अर्थात 18 फरवरी से 16 अप्रैल एवं दो राशियां मीन और मेष
३. ग्रीष्म ऋतु - ज्येष्ठ और आसाढ़ मास अर्थात 17 अप्रैल से 19 जून एवं दो राशियां वृष और मिथुन
दक्षिणायन के साथ वर्षा ऋतु प्रारम्भ होती जिसमें भी तीन ऋतुओं का समावेश होता है और वे तीन ऋतुएँ हैं :
१. वर्षा ऋतु - सावन औए भादों मास अर्थात 20 जून से 21 अगस्त एवं दो राशियां कर्क और सिंह
२. शरद ऋतु - अश्विन और कार्तिक मास अर्थात 22 अगस्त से 21 अक्टूबर एवं दो राशियां कन्या और तुला
३. हेमंत - अगहन और पौष मास अर्थात 22 अक्टूबर से 20 दिसंबर एवं दो राशियां वृश्चिक और धनु
सुश्रुत संहिता के अध्याय 6 के 10 वे श्लोक एवं चरक संहिता विमान के अध्याय 8 के 125 वे श्लोक के अनुसार वात, पित्त, कफ के संचय प्रकोप एवं संशोधन कर्म की दृष्टि से
छः ऋतुओं का वर्गीकरण इस प्रकार है जिसमे ग्रीष्म और वर्षा काल के बीच प्रावृट ऋतु मानी गई है और शिशिर ऋतु नहीं है जबकि पहले वर्गीकरण में प्रावृट ऋतु नहीं है ।
१. बसंत ऋतु- फाल्गुन, चैत्र माह् (फरवरी-मार्च )
२. ग्रीष्म ऋतु- वैशाख, ज्येष्ठ माह (अप्रैल-मई )
३. प्रावृट ऋतु- आषाढ़, श्रावण माह(जून-जुलाई)
४. वर्षा ऋतु- भाद्रपद, आश्विन(अगस्त-सितंबर )
५. शरद ऋतु- कार्तिक, मार्गशीष(अक्टू.- नवंबर )
६. हेमंत ऋतु- पौष, माघ(दिसंबर-जनवरी )
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